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रिश्ते पैसो के मोहताज़ नहीं होते l

रिश्ते पैसो के मोहताज़ नहीं होते l क्योकि कुछ रिश्ते  मुनाफा नहीं देते ,, पर अमीर जरूर बना देते है  …l इस अजनबी सी दुनिया में, अकेला इक ख्वाब हूँ. सवालों से खफ़ा, चोट सा जवाब हूँ. जो ना समझ सके, उनके लिये "कौन". जो समझ चुके, उनके लिये किताब हूँ.

मोहब्बत बढती जा रही है क्या कहूँ, केसे कहूँ..

तू भी कभी महसूस कर क्या है बिखरने की तड़प …. एक रोज़ बाज़ी यूँ सजे, शीशा तेरा पत्थर मेरा ..!! # ना_तेरे_आने_की_खुशी …. # ना_तेरे_जाने_का_गम ….. # बीत_गया_वो_जमाना ….. # जब_तेरे_दिवाने_थे_हम …… काश कि कयामत के दिन हिसाब हो सब बेबफाओँ का.. और वो मुझसे लिपट कर कहे कि, मेरा नाम मत लेना.!! कुछ इस अदा से तोड़े हैं ताल्लुक उसने, एक मुद्दत से ढूंढ़ रहा हूँ कसूर अपना…!!! ये आंसुओं कि ज़कात मुझ पे ही फर्ज क्यों.. वो भी तो कुछ अदा करे, मोहब्बत उसे भी थी.. झूठ कहते हैं लोग कि मोहब्बत सब कुछ छीन लेती है,.. मैंने तो मोहब्बत करके, ग़म का खजाना पा लिया .. जलवे तो बेपनाह थे इस कायनात में, . . ये बात और है कि नजर तुम पर ही ठहर गई। क़दर करलो उनकी जो तुमसे बिना मतलब की चाहत करते हैं… दुनिया में ख्याल रखने वाले कम और तकलीफ देने वाले ज़्यादा होते है..! इश्क़ तो बस नाम दिया है दुनिया ने, एहसास बयां कोई कर पाये तो बात हो!! तरस गए हैं तेरे लब से कुछ सुनने को हम….. प्यार की बात न सही….कोई शिकायत ही कर दे… तुझ से दूर रहकर…. मोहब्बत बढती जा रही है क्या कहूँ… केसे कहूँ… ये दुरी तु...

Tumhe kya pata kitni haseen ho tum.....

Tumhe kya pata kitni haseen ho tum, Dekhne ko tarasti hain nazrein jise wo naaz neen ho tum.. Haya chanchalta koi sikhe tumse, Nazroon main samaana dil ko churana koi sikhe tumse, Hum to Kayal hain teri adaaoon ke.... Koi adaa banana sikhe tumse, Bin nashe ke jo nasha kr de aisi dil nasheen ho tum, Kasam us khuda ki itni haseen ho tum... Jaan se jayaada chaha hai isiliye jaa-nseen ho tum, Mat pucho is dil se ki kitni haseen ho tum… 

"चाँद को इतना तो मालूम है तू प्यासी है,

" चाँद को इतना तो मालूम है तू प्यासी है, तू भी अब उस के निकलने का इंतजार ना कर , भूख गर जब्त से बाहर है तो कैसा रोज़ा ? इन गवाहों की ज़रूरत पे मुझे प्यार ना कर ..." Let's view the holy chand of love(करवाचौथ) "नहीं कहा जो कभी, खामखाँ समझती है , जो चाहता हूँ मैं कहना कहाँ समझती है सब तो कहते थे ताल्लुक में इश्क के अक्सर आखँ को आखँ , ज़बाँ को जबाँ समझती है .... "लहर का ख़म निकाला जा रहा है नदी पर बांध डाला जा रहा है कहाँ नीदें मेरी पलकों में ठहरें किसी का ख्वाब पाला जा रहा है ...." गजब की है फरमाइशें इस दिल-ऐ-नादान की , वो होते , हम होते और होंठों पे होंठ होते !!